जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता
Book Details & Order Information
जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता
पुस्तक का नाम : जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता
लेखक : बी एल पारस
विधा : कविता संग्रह
भाषा : हिन्दी
आईएसबीएन : 978-81-991880-4-4
पृष्ठ संख्या : 80
सहयोग राशि : 120 रुपये
यह कविता-संग्रह समकालीन हिन्दी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप की तरह दिखाई देता है। कवि ने उन स्त्रियों की आवाज़ को शब्द दिए हैं जिन्हें सदियों से सौंदर्य के कृत्रिम मानकों और सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण हाशिये पर रखा गया। संग्रह का शीर्षक ही स्थापित सौंदर्य-मिथकों पर एक तीखा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
इन कविताओं में स्त्री-विमर्श केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अस्तित्व की खोज का संघर्ष है। साथ ही दलित विमर्श के संदर्भ में कवि सामाजिक विषमता, अपमान और मानवीय गरिमा के संकट को संवेदनशीलता और तीखे यथार्थ के साथ सामने लाते हैं। कविताएँ पाठक को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि असली सुंदरता मनुष्य की संवेदना, संघर्ष और स्वाभिमान में निहित है।
संग्रह की कुछ प्रेम कविताएँ इस गंभीर सामाजिक सरोकार के बीच कोमल भावभूमि रचती हैं, जिससे रचना-विश्व में संतुलन और मानवीय ऊष्मा बनी रहती है। भाषा सरल, प्रभावी और मार्मिक है, जो सीधे पाठक के मन तक पहुँचती है। समग्र रूप से “जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता” केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदना, समानता और मानवीय गरिमा की पक्षधर एक सशक्त काव्य-यात्रा है।
लेखक : बी एल पारस
विधा : कविता संग्रह
भाषा : हिन्दी
आईएसबीएन : 978-81-991880-4-4
पृष्ठ संख्या : 80
सहयोग राशि : 120 रुपये
यह कविता-संग्रह समकालीन हिन्दी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप की तरह दिखाई देता है। कवि ने उन स्त्रियों की आवाज़ को शब्द दिए हैं जिन्हें सदियों से सौंदर्य के कृत्रिम मानकों और सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण हाशिये पर रखा गया। संग्रह का शीर्षक ही स्थापित सौंदर्य-मिथकों पर एक तीखा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
इन कविताओं में स्त्री-विमर्श केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अस्तित्व की खोज का संघर्ष है। साथ ही दलित विमर्श के संदर्भ में कवि सामाजिक विषमता, अपमान और मानवीय गरिमा के संकट को संवेदनशीलता और तीखे यथार्थ के साथ सामने लाते हैं। कविताएँ पाठक को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि असली सुंदरता मनुष्य की संवेदना, संघर्ष और स्वाभिमान में निहित है।
संग्रह की कुछ प्रेम कविताएँ इस गंभीर सामाजिक सरोकार के बीच कोमल भावभूमि रचती हैं, जिससे रचना-विश्व में संतुलन और मानवीय ऊष्मा बनी रहती है। भाषा सरल, प्रभावी और मार्मिक है, जो सीधे पाठक के मन तक पहुँचती है। समग्र रूप से “जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता” केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदना, समानता और मानवीय गरिमा की पक्षधर एक सशक्त काव्य-यात्रा है।