Jin Ladkiyon Ka Chehra Chand Jaisa Nhi Hota
Book Details & Order Information
Jin Ladkiyon Ka Chehra Chand Jaisa Nhi Hota
पुस्तक का नाम : जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता
लेखक : बी एल पारस
विधा : कविता संग्रह
भाषा : हिन्दी
आईएसबीएन : ***
पृष्ठ संख्या : 80
सहयोग राशि : 100 रुपये
( THIS BOOK WILL BE AVAILABLE SOON)
‘जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता’ संग्रह सुंदरता की रूढ़ परिभाषाओं और चुप्पी की परंपराओं के विरुद्ध लिखी गई कविताओं का दस्तावेज़ है।
यह एक ऐसा कविता संग्रह है जो समाज द्वारा गढ़े गए सौंदर्य मानकों, लैंगिक असमानताओं और स्त्री अनुभवों को केंद्र में रखकर लिखा गया है। ये कविताएँ उन लड़कियों और स्त्रियों की आवाज़ हैं जिन्हें अक्सर उनके रूप, शरीर या चुप रहने की अपेक्षाओं में बाँध दिया जाता है।
इस संग्रह की कविताएँ स्त्री विमर्श की गहरी समझ से जन्मी हैं जहाँ सवाल केवल स्त्रियों के अधिकारों का नहीं, बल्कि मानव गरिमा, समानता और संवेदना का है। कवि स्त्री जीवन के संघर्षों, इच्छाओं, असुरक्षाओं और साहस को आदर्शवाद की बजाय यथार्थवादी दृष्टिकोण से सामने रखता है।
संग्रह की एक विशेषता ये भी है कि ये स्त्री अनुभवों के साथ-साथ पुरुष मन की अनकही पीड़ाओं को भी संबोधित करता है। इस तरह यह संग्रह स्त्री-पुरुष के बीच खड़ी दीवारों को तोड़ने की कोशिश करता है, न कि उन्हें और ऊँचा करने की।
लेखक : बी एल पारस
विधा : कविता संग्रह
भाषा : हिन्दी
आईएसबीएन : ***
पृष्ठ संख्या : 80
सहयोग राशि : 100 रुपये
( THIS BOOK WILL BE AVAILABLE SOON)
‘जिन लड़कियों का चेहरा चाँद जैसा नहीं होता’ संग्रह सुंदरता की रूढ़ परिभाषाओं और चुप्पी की परंपराओं के विरुद्ध लिखी गई कविताओं का दस्तावेज़ है।
यह एक ऐसा कविता संग्रह है जो समाज द्वारा गढ़े गए सौंदर्य मानकों, लैंगिक असमानताओं और स्त्री अनुभवों को केंद्र में रखकर लिखा गया है। ये कविताएँ उन लड़कियों और स्त्रियों की आवाज़ हैं जिन्हें अक्सर उनके रूप, शरीर या चुप रहने की अपेक्षाओं में बाँध दिया जाता है।
इस संग्रह की कविताएँ स्त्री विमर्श की गहरी समझ से जन्मी हैं जहाँ सवाल केवल स्त्रियों के अधिकारों का नहीं, बल्कि मानव गरिमा, समानता और संवेदना का है। कवि स्त्री जीवन के संघर्षों, इच्छाओं, असुरक्षाओं और साहस को आदर्शवाद की बजाय यथार्थवादी दृष्टिकोण से सामने रखता है।
संग्रह की एक विशेषता ये भी है कि ये स्त्री अनुभवों के साथ-साथ पुरुष मन की अनकही पीड़ाओं को भी संबोधित करता है। इस तरह यह संग्रह स्त्री-पुरुष के बीच खड़ी दीवारों को तोड़ने की कोशिश करता है, न कि उन्हें और ऊँचा करने की।