Rungrej
Book Details & Order Information
Rungrej
पुस्तक का नाम : रूंगरेज़
लेखक : बी एल पारस
विधा : आत्मकथा
भाषा : राजस्थानी
आईएसबीएन:
पृष्ठ संख्या :
सहयोग राशि :
( THIS BOOK WILL BE AVAILABLE SOON)
‘रूंगरेज’ मतलब रंगों से भरा जीवन नहीं बल्कि संघर्षों से रचा हुआ व्यक्तित्व।
रूंगरेज़ केवल एक व्यक्ति की आत्मकथा नहीं बल्कि दुनिया के हर उस युवा की ज़िंदगी का कटु यथार्थ है जो भेदभावों, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बीच अपने सपनों के रंग भरने का साहस करता है।
बी एल पारस इस किताब में अपने जीवन के अनुभवों को पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस के साथ सामने रखते हैं। बचपन की परिस्थितियाँ, सामाजिक भेदभाव, शिक्षा के लिए किया गया संघर्ष और सफल होने के बाद समाज को दिशा देने के प्रतिबद्ध प्रयास, इन सब बातों को लेखक ने बिना किसी बनावट के सहज, प्रवाहपूर्ण और रोचक लहजे में दर्ज किया है। लेखक का जीवन स्वयं एक प्रश्न बनकर सामने आता है- क्या परिस्थितियाँ ही मनुष्य के जीवन की दिशा तय करती हैं या मनुष्य परिस्थितियों को?
यह पुस्तक पाठक को केवल पढ़ने का अनुभव नहीं देती बल्कि भीतर तक झकझोरती है और सोचने पर मजबूर करती है। इसे पढ़ते हुए न केवल जाति, वर्ग, धर्म की संकीर्णताएँ ध्वस्त होती प्रतीत होती हैं बल्कि राष्ट्रों की सरहदें लाँघते हुए यह किताब हमें एक संवेदनशील विश्व नागरिक बनने की प्रेरणा देती है।
लेखक : बी एल पारस
विधा : आत्मकथा
भाषा : राजस्थानी
आईएसबीएन:
पृष्ठ संख्या :
सहयोग राशि :
( THIS BOOK WILL BE AVAILABLE SOON)
‘रूंगरेज’ मतलब रंगों से भरा जीवन नहीं बल्कि संघर्षों से रचा हुआ व्यक्तित्व।
रूंगरेज़ केवल एक व्यक्ति की आत्मकथा नहीं बल्कि दुनिया के हर उस युवा की ज़िंदगी का कटु यथार्थ है जो भेदभावों, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बीच अपने सपनों के रंग भरने का साहस करता है।
बी एल पारस इस किताब में अपने जीवन के अनुभवों को पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस के साथ सामने रखते हैं। बचपन की परिस्थितियाँ, सामाजिक भेदभाव, शिक्षा के लिए किया गया संघर्ष और सफल होने के बाद समाज को दिशा देने के प्रतिबद्ध प्रयास, इन सब बातों को लेखक ने बिना किसी बनावट के सहज, प्रवाहपूर्ण और रोचक लहजे में दर्ज किया है। लेखक का जीवन स्वयं एक प्रश्न बनकर सामने आता है- क्या परिस्थितियाँ ही मनुष्य के जीवन की दिशा तय करती हैं या मनुष्य परिस्थितियों को?
यह पुस्तक पाठक को केवल पढ़ने का अनुभव नहीं देती बल्कि भीतर तक झकझोरती है और सोचने पर मजबूर करती है। इसे पढ़ते हुए न केवल जाति, वर्ग, धर्म की संकीर्णताएँ ध्वस्त होती प्रतीत होती हैं बल्कि राष्ट्रों की सरहदें लाँघते हुए यह किताब हमें एक संवेदनशील विश्व नागरिक बनने की प्रेरणा देती है।